देश बचाओ अभियान के बैनर तले शहीद जगदेव प्रसाद का 49 वीं शहादत दिवस मनाया।
जगदेव प्रसाद सच्चे अर्थों में शोषित पीडित वंचित गरीबों के आवाज, क्रांतिकारी बहुजन नायक थे - किरण देव यादव
अलौली खगड़िया।
देश बचाओ अभियान फरकिया मिशन बैनर तले संपर्क कार्यालय अलौली में शहीद जगदेव प्रसाद का 49 वीं शहादत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर शहीद जगदेव प्रसाद अमर रहे, शहीदों तेरे अरमानों को मंजिल तक पहुंचाएंगें, नारों के बीच उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण पुष्पांजलि समर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई तथा कोटि-कोटि नमन किया गया।
अभियान के संस्थापक अध्यक्ष किरण देव यादव ने कहा कि शहीद जगदेव प्रसाद ने कहा था कि "सौ में नब्बे शोषित हैं, शोषितों ने ललकारा है। धन- धरती और राजपाट में, नब्बे भाग हमारा है।
श्री यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जिसकी जितनी भागीदारी जितनी आबादी, उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
मिशन सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय सचिव किरण देव यादव कहा कि बिहार में समतामूलक लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना के लिए संघर्ष करने वाले महान योद्धा, बिहार में सामाजिक- सांस्कृतिक क्रांति का नेतृत्व करने वाले,बहुजनों के अधिकारों के लिए आंदोलनरत जगदेव प्रसाद का 5 सितंबर,1974 ई को कुर्था प्रखंड में आयोजित हजारों लोगों की सभा में सवर्ण गुंडों एवं पुलिस बलों ने दमन, उत्पीड़न और गोलीकांड के जरिए दिनदहाड़े जगदेव बाबू की हत्या कर दी थी। इस गोली कांड में एक छात्र भी मारे गए थे और दर्जनों लोग घायल हुए थे। जगदेव बाबू के मृत शरीर को पटना विधायक क्लब में रामलखन सिंह यादव एवं भोला प्रसाद सिंह आदि के प्रयास से 6 सितंबर को लाया गया था और 7 सितंबर को उनकी शवयात्रा निकाली गई थी जिसमें लाखों आक्रोशित लोगों ने भाग लेकर अश्रुपूरित नेत्रों से उन्हें श्रद्धाजंलि थीं। उनकी शहादत सदैव याद रहेगी।
श्री यादव ने कहा कि जगदेव प्रसाद का जन्म 2 फरवरी,1922 ई में पिता प्रयाग नारायण, माता रासकली देवी के घर में हुई थी। उनकी शादी अशिक्षित सत्य रंजना जी के साथ हुई थी। वे दो भाई व दो बहन थे।
उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा 1944 में और 1948 ई में बी ए की परीक्षा पास की थीं। 1950 ई में उन्हें एम ए, अर्थशास्त्र की डिग्री मिली थीं। उन्होंने 1953 ई से 1956 ई तक में क्रमशः तीन पत्रिकाओं जनता,सीटीजन एवं उदय का प्रकाशन एवं संपादन किया। राष्ट्रीय स्तर पर आन्दोलन के निर्माण के लिए उन्होंने 1956 ई में बाबा साहेब डॉ आंबेडकर से भेंट कर वार्ता की थीं।किन्तु बाबा साहेब की 06 दिसम्बर,1956 ई में हुई आकस्मिक मृत्यु से आन्दोलन के अगले कदम पर रोक लग गई। जगदेव बाबू ने 1967 ई में शोषित दल का गठन किया था और इस दल के नेतृत्व में 1फरवरी 1968 में माननीय बी पी मंडल की सरकार बनी थी। उसमें जगदेव बाबू सिंचाई और नदी घाटी योजना मंत्री बने थे।इसी वर्ष उन्होंने शोषित पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया।1972 ई में उन्होंने अर्जक संघ के संस्थापक मान्यवर रामस्वरुप वर्मा जी के साथ मिलकर शोषित समाज दल के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाईं। वे पूरे बहुजन समाज की एकता और राजनीतिक अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे थे और इसी क्रम में सवर्ण गुंडों ने उनकी हत्या कर दी।
जगदेव बाबू कहते थे कि " ऊंची जाति वालों ने हमारे बाप दादाओं से हलवाही करवाई है, हम उनकी राजनीतिक हलवाही करने के लिए पैदा नहीं हुए हैं।" दस प्रतिशत शोषक बनाम नब्बे प्रतिशत शोषितों की ईज्जत और रोटी की लड़ाई भारत में वैज्ञानिक समाजवाद या कम्यूनिज्म की असली लड़ाई है। ईश्वर, देवी-देवता, पूजा-पाठ,भाग्य, शुभ-अशुभ और धार्मिक कर्मकांड आदि ये सभी शोषितों को गुलाम बनाए रखने के लिए ब्राह्मणवादी हथियार हैं। उनका नारा था - अबकी सावन भादो में,गोरी कलाईयां कादो में। नब्बे पर दस का शासन, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा! मानवतावाद की क्या पहचान- ब्राह्मण भंगी एक समान। पुनर्जन्म और भाग्यवाद, इनसे जन्मा ब्राह्मणवाद! ऊंची जात की क्या पहचान,गिटपीट बोले करे न काम। नीची जात की क्या पहचान,करे काम पर सहे अपमान।
उन्होंने कहा था कि दस प्रतिशत शोषकों के जुल्मों से छुटकारा दिला कर नब्बे प्रतिशत शोषितों को नौकरशाही और जमीन दौलत पर हक दिलाना और सम्मान दिलाना ही सही सामाजिक न्याय है।
समाजसेवी श्री यादव ने कहा कि आज वर्तमान व्यवस्था के खिलाफ बहुजन क्रांति की जरूरत है। हम उनके सपनों का बिहार और भारत का निर्माण करें और अपने क्रांतिकारी सामाजिक न्याय के महानायक एवं बिहार के लेनिन के प्रति हार्दिक श्रद्धांजलि और शत-शत नमन समर्पित करते हैं। उनके बताए रास्ते पर चलकर ही सपना को साकार किया जा सकता है।
कार्यक्रम में बृजनंदन सिंह महेंद्र यादव महेश्वर यादव अनिल कुमार विजय यादव विनोद राम दिनेश शाह आदि सामाजिक कार्यकर्ताओं ने व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई तेज करने का संकल्प लिया।


