कबीर दास का 625 वीं जयंती आपसी प्रेम दिवस - सामाजिक सौहार्द दिवस के रूप में मनाया गया।

कबीर दास का 625 वीं जयंती आपसी प्रेम दिवस - सामाजिक सौहार्द दिवस के रूप में मनाया गया।



कबीर साहेब के जीवनी व्यक्तित्व कृतित्व से सीख लेकर उनके बताए रास्ता आपसी प्रेम भाईचारा से ही देश विश्व गुरु बनेगा - किरण देव यादव


खगड़िया।


 देश बचाओ अभियान के तत्वाधान में महान संत कबीर दास का  625 वीं जयंती यशोदा नगर खगड़िया में मनाया गया।

इस अवसर पर कबीरदास के प्रतिमा तैल चित्र के समक्ष उनके दोहा का पाठ कर कोटि-कोटि नमन किया गया।

देश बचाओ अभियान के संस्थापक अध्यक्ष किरण देव यादव ने कहा कि कबीरदास सच्चे अर्थों में महान संत पथ प्रदर्शक समाज सुधारक उपदेशक गायक लेखक कवि थे जिन्होंने अंधविश्वास पाखंडवाद कर्मकांड रूढ़िवाद सामाजिक बुराइयां कुरीतियों के खिलाफ दोहे के माध्यम से आम जनों को जागृत किए। वही आपसी प्रेम भाईचारा शांति सद्भाव सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का नसीहत व संदेश दिए। मानवता का पाठ एवं मानव जीवन के सार्थक दिशा दृष्टिगोचर किए।

उन्होंने ब्रज अवधी भोजपुरी भाषा में अनेकों दोहे की रचना,, पत्थर पूजे हरि मिले, ढाई आखर प्रेम का, सब धरती कागज करूं, ऐसी बानी बोलिए, आदि के माध्यम से उपदेशात्मक पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाये।

उनका जन्म जेठ शुक्ल पूर्णिमा को 1398 ईसवी में काशी के लहरतारा में ब्राह्मण कन्या के कोट्स जन्म हुआ तथा भरण पोषण नीमा एवं नीरू मुस्लिम बुनकर जुलाहा के घर काशी में हुआ तथा मृत्यु 1518 ईस्वी को मगहर में हुआ था। उन्होंने आजीवन काशी में ही जीवन बिताया किंतु मरने के समय में मगहर में जाकर मृत्यु को प्राप्त किये, क्योंकि ब्राह्मणों ने अंधविश्वास फैलाए हुए था कि मगहर में मरने वाले नरक में जाते हैं एवं काशी में मरने वाले स्वर्ग जाते हैं, उन्होंने इस अंधविश्वास को तोड़े। हिंदू , कबीर दास को महान संत एवं मुस्लिम , सूफी के रूप में मानते थे। इसलिए मरणोपरांत इनका समाधि एवं मजार दोनों है, चुंकि इनके मरणोपरांत हिंदू दाह संस्कार करने एवं मुस्लिम दफनाने को लेकर आपस में लड़ गए थे। 

बिहार प्रदेश पंच सरपंच संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष जिला अध्यक्ष किरण देव यादव ने कहा कि महान संत सूफी कबीर साहेब ने हिंदू मुस्लिम एकता का संदेश दिया तथा उन्होंने जाति धर्म पंथ मजहब को तोड़कर प्रेम का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय, उनके जीवनी व्यक्तित्व कृतित्व से सीख लेने की जरूरत आज के धार्मिक ठेकेदारों को है।

कार्यक्रम में पूर्व मुखिया मक्खन शाह अधिवक्ता देवेंद्र सिंह, कर्मचारी नेता चंद्रशेखर मंडल, बबलू कुमार रूपेश कुमार आदि ने भाग लिया।

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