नव वर्ष में बदल जाएगी ऐतिहासिक गिरीहिंडा पहाड़ की तस्वीर।
गिरिहिंडा मंदिर जाने वाली सड़क का होगा चौड़ीकरण
एक करोड़ 83 लाख रुपए की राशि खर्च करेगी नगर परिषद
शेखपुरा।
शहर के ऐतिहासिक गिरीहिंडा पहाड़ पर अवस्थित कामेश्वरनाथ शिव मंदिर नए साल में आकर्षक रंग रूप में होगा. डीएम सावन कुमार की पहल से गिरिहिंडा पहाड़ की सड़क का दोहरीकरण किया जायगा . इसकी जानकारी देते हुए शेखपुरा नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी डॉ जनार्दन प्रसाद वर्मा ने बताया कि गिरीहिंडा पहाड़ पर अवस्थित मंदिर जाने वाली सड़क मार्ग का दोहरीकरण किया जाएगा . इसके लिए एक करोड़ 83 लाख रुपए का टेंडर किया जा चुका है.इस योजना के लिए स्थानीय विधायक विजय सम्राट ने भी महती भूमिका निभाई थी. नए साल में इस पर कार्य शुरू हो जाएगा .इसके साथ ही गिरिहिंडा पहाड़ पर बिजली की भी व्यवस्था की जाएगी . शेखपुरा नगर परिषद अपने आंतरिक संसाधन से इसके लिए राशि खर्च करेगी .उन्होंने बताया की रजिस्ट्री कार्यालय से प्राप्त स्टाम्प डियूटी की दो प्रतिशत राशि इस मद में खर्च की जायगी .पौराणिक एतिहासिक मंदिर जाने के लिए सडक का दोहरीकरण करने के साथ ही रात्रि में इस सड़क मार्ग पर आने जाने वाले पर्यटकों की सुविधा के मदेनजर बिजली की रौशनी का प्रबन्ध भी किया जायगा .
सिंगल सडक होने से होती है परेशानी
वर्तमान समय में सड़क सिंगल होने के कारण चार पहिया वाहनों के लिए काफी खतरनाक प्रतीत होता है .क्योंकि पहाड़ की ढलाई पर जब एक वाहन आ रहा होता है तो दूसरे वाहनों के लिए कोई जगह नहीं होती है .इससे इस मंदिर की ओर आने -जाने वाले लोगों को हमेशा भय सताते रहता है.जिससे सड़क दोहरीकरण होने के साथ निजात मिल जाएगी .
पहाड़ पर शानिमंदिर और काली मंदिर का भी हुआ निर्माण
अपने अद्भुत छट्टा को लेकर यह मंदिर यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षक का केंद्र हैं.इस पहाड़ पर अधिवक्ता आतोष कुमार के प्रयास से काली मंदिर और शानिमंदिर का भी निर्माण कराया जा चुका है .बाबा रामदास वर्तमान समय में इस कामेश्वर नाथ मंदिर की देखरेख बर्षों से कर रहे हैं .
डेढ़ सौ साल साल पहले बनाया गया मंदिर
इस पहाड़ पर शिवलिंग की स्थापना महाभारत काल की बताई जाती है . जबकि,कामेश्वर नाथ मंदिर का निर्माण करीब डेढ़ सौ साल पहले की बताई जाती है . इसका निर्माण शहर के गिरिहिंडा निवासी जमींदार बाबू बुलाकी लाल और उनके भाई शिव नारायण लाल के प्रयास से किया गया था. इस मंदिर के नाम पर ही अपने पुत्र का नाम बाबू बुलाकी लाल ने कामेश्वरी प्रसाद रखा .इस मंदिर का देखरेख देश ही आज़ादी के पूर्व इस परिवार के हाथों था. आजादी के बाद जब जमीदारी प्रथा समाप्त होने लगी तो यह मंदिर को सरकार अपने कब्जे में लेने लगी .इसी देखते हुए बाबू बुलाकी लाल ने इसे पुजारी के हवाले अंग्रेजों को सौंप देने की बात कही .इसके बाद से इस मंदिर की देखरेख पुजारी के हाथों होता है .इसकी जानकारी देते हुए उनके वंशज अधिवक्ता आतोष कुमार ने कहा कि गिरिहिंडा ऐतिहासिक पहाड़ की सिढ़ी का निर्माण शहर के बड़े व्यापारी और सामाजिक कार्यों में रूचि रखने वाले सुकन साव के प्रयास से पत्थरों के टुकड़े से सीढ़ी का निर्माण किया गया था जिसका स्वरूप बदल गया है.

