वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आम बजट पूंजीपति परस्त, आमजन विरोधी, बिहार विरोधी, गरीब मध्यमवर्ग विरोधी, बजट मात्र छलावा, चुनावी बजट है - किरण देव यादव

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आम बजट पूंजीपति परस्त, आमजन विरोधी, बिहार विरोधी, गरीब मध्यमवर्ग विरोधी, बजट मात्र छलावा, चुनावी बजट है - किरण देव यादव



विश्व गुरु बनने योग्य बजट नहीं, बजट से आर्थिक विषमता बढ़ेगी, इस बजट से देश समृद्ध नहीं होगा - किरण देव यादव


अलौली खगड़िया


भाकपा माले के जिला संयोजक सह मिशन सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय सचिव किरण देव यादव ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में बजट पेश करने पर किसान मजदूर महिला छात्र नौजवान आमजन विरोधी, गरीब मध्यमवर्ग विरोधी, एवं बिहार विरोधी करार दिया। प्रस्तुत बजट चुनावी बजट व छलावा बजट है। उक्त बजट से देश समृद्ध नहीं हो पाएगा और ना ही देश विश्व गुरु बन पाएगा।

उन्होंने कहा कि यह बजट आकर्षक शब्दों में पिरो कर लोकलुभावन एवं हवा हवाई  है जो हाथी का दांत साबित होगा। श्री यादव ने कहा कि इस बजट से आम जनता का भला होने वाला नहीं है। यह बजट देश एवं जनहित में नहीं है बल्कि पूंजीपतियों उद्योगपतियों के हित में है।

देश बचाओ अभियान के संस्थापक अध्यक्ष सह माले नेता किरण देव यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस बजट में 2 करोड़ नौजवानों को रोजगार देने, स्मार्ट सिटी बनाने, डिजिटल इंडिया बनाने, किसान मजदूरों की आय दोगुनी करने, न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दायरे में लाने, महंगाई बेरोजगारी गरीबी कम करने, निजीकरण पर रोक लगाने, गरीबों के खाता पर 15 लाख रुपए भेजने, देश की सुरक्षा एवं विश्व गुरु बनाने की दिशा में कोई मजबूत आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे देश एवं देशवासी का कल्याण हो सके। बजट में आईएमएफ एवं विश्व बैंक का हवाला देकर विकास का कोरी सपना दिखाया गया है। देश का रीढ किसान एवं असंगठित खेतिहर मजदूर के विकास हेतु कोई प्रावधान नहीं है। देश की रीढ को तोड़ने वाली बजट है। देश को आर्थिक गुलामी की ओर धकेलने वाली बजट है। किसानों को ऋण मुक्ति करने का कोई प्रावधान नहीं है। कल्याणकारी योजनाओं में सब्सिडी खत्म कर दी गई है।

बिहार को न ही विशेष पैकेज और ना ही विशेष राज्य का दर्जा दी गई। श्री यादव ने कहा कि बजट में आर्थिक विषमता दूर करने तथा भारत की बेहतर भविष्य निर्माण करने व समृद्ध करने हेतु कोई दृष्टिकोण नहीं है। कुल मिलाकर केंद्रीय बजट विकास विरोधी , आम जनता की उम्मीद पर पानी फेरने वाला, निराश करने वाला बजट है। बजट नकारा साबित हुई।

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