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पंडित पार्था बोस के सितार और आर्कोदीप दास के तबला की तान से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक।

पंडित पार्था बोस के सितार और आर्कोदीप दास के तबला की तान से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक।



दुनिया के सबसे अद्वितीय भारतीय शास्त्रीय संगीत का कोई मुकाबला नहीं है। आज लोग बड़े-बड़े साउंड बॉक्स और डीजे की धुन में पर झूम रहे हैं। लेकिन जो शांति, शालीनता और भारतीय संस्कृति की झलक शास्त्रीय संगीत में दिखती है, वह कहीं और नहीं मिल सकती है। इसे एक बार फिर साबित कर दिया विश्व प्रसिद्ध सितार वादक पंडित पार्था बोस ने, उनके साथ तबला पर संगत कर रहे थे आर्कोदीप दास। भारतीय संगीत से दुनिया को रूबरू करने में जुटे स्पीक मैके द्वारा बेगूसराय के भारद्वाज गुरुकुल में आयोजित कार्यक्रम में पंडित पार्था बोस ने जब अपने सितार पर राग छेड़ा तो तबला पर संगत कर रहे आर्कोदीप दास के धुन ने उपस्थित लोगों को आत्ममुग्ध कर दिया और शिक्षक एवं बुजुर्ग ही नहीं, बच्चे भी झूम उठे।


दोनों की जुगलबंदी ने बगैर शोर मचाए बता दिया कि प्रकृति का सृजन एवं संचालन भी वाइब्रेशन से है और संगीत ही जीवन है। भारत की शान शास्त्रीय संगीत में हर दिन एक सबक सीखा जाना है। दीपक प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित पार्था बोस, आर्कोदीप दास, जीडी कॉलेज के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. शशिकांत पांडेय, भारद्वाज गुरुकुल के निदेशक शिव प्रकाश भारद्वाज, नाट्य निर्देशक ऋषिकेश कुमार एवं सामाजिक कार्यकर्ता रोशन कुमार ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।



मौके पर पंडित पार्था बोस ने कहा कि संगीतकार प्यार का गुलाम होता है। स्पीक मैके पुरी दुनिया में चर्चित और अद्भुत भारतीय शास्त्रीय संगीत को हर जन तक पहुंचा रहा है। स्पीक मैके का कार्यक्रम सिर्फ आनंद लेना देना ही नहीं है, बल्कि इससे बहुत ऊपर और अलग की सोच है। भारतीय संगीत के कारण दुनिया में भारत को सम्मान मिलता है, यह भारतीय संस्कृति को जागृत करता है और संगीत सिर्फ गायक और वादक नहीं, श्रोता से बजता है। विनम्रता ही शिक्षित होने की पहचान है और सीखना बंद करते ही आपकी मृत्यु हो जाती है।

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