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मोदी सरकार एवं आरबीआई द्वारा 2000 रुपए का पुनः नोटबंदी एक तुगलकी फरमान, आमजन को परेशान करने एवं सरकारी खजाने को लूटने लूटाने की साजिश मात्र - किरण देव यादव

मोदी सरकार एवं आरबीआई द्वारा 2000 रुपए का पुनः नोटबंदी एक तुगलकी फरमान, आमजन को परेशान करने एवं सरकारी खजाने को लूटने लूटाने की साजिश मात्र - किरण देव यादव



देश की गलत आर्थिक नीति के कारण आर्थिक व्यवस्था चौपट होगा एवं देश अस्थिर होगा - एमएसपी


500 रुपए की नोटबंदी पर काला धन वापस आया ? गरीब के जनधन खाते पर 15 लाख रुपया आया ? जवाब दे आरबीआई व मोदी सरकार - किरण देव यादव


नोटबंदी, पुनर्मुषिको भव एवं चौब्बे चले छब्बे बनने, दुब्बे बन गए, कहावत चरितार्थ


अलौली खगड़िया


 देश बचाओ अभियान के संस्थापक अध्यक्ष किरण देव यादव ने केंद्र की मोदी सरकार व आरबीआई द्वारा 2000 रुपए के नोट को एक बार पुनः बंद करने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की यह आर्थिक नीति जनता को परेशान करने वाली व तुगलकी फरमान है। मिशन सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय सचिव किरण देव यादव ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा बार-बार नोटबंदी एवं गलत आर्थिक नीति से देश अस्थिर होगा। देश की आर्थिक व्यवस्था चौपट होगी। कहा कि सरकार की गलत आर्थिक नीति एवं पुनः नोटबंदी के आड़ में देश की खजाने को लूटने लुटाने की साजिश मात्र है।

 श्री यादव ने कहा कि चौव्वे चले छब्बे बनने, दुब्बे बन गए,  पुनर्मुषिको भव, वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।

नोट बंद करने, बदली करने, नई नोट जारी करने का सारा तर्क, कुतर्क तुगलकी एवं जनता को परेशान करने वाली निर्णय साबित हुई है।

सरकार एवं आरबीआई द्वारा काला धन पर रोक लगाने जैसी रटी रटाई तर्क बेबुनियाद है चुंकि 500 के नोटबंदी करने एवं 2000 के नोट चालू करने पर भी काला धन पर रोक लगाने की बात बड़ी जोर शोर से कही गई थी, क्या हश्र हुआ ? क्या काला धन वापस आया ? बल्कि उसे सफेद कर दिया गया। क्या आतंकवाद में कमी आई ? आज भी जारी है। ₹2000 पर लगी चीप का क्या प्रभाव पड़ा ? क्या गरीबों के जनधन खाता पर 15 लाख रुपए आया? सभी घोषणाएं डपोड़शंखी साबित हुई। एक बार पुनः काला धन रोकने के नाम पर ₹2000 को बंद करने, वापस करने, बदलने, विकल्प के तौर पर नई नोट जारी करने में आम जनता परेशान होंगे । पिछले बार 165 लोगों की मौत बैंक में लाइन लगके हुई थी। पुनः ऐसी ही हालात होने की संभावना बनेगी, चुंकि पूंजीपति लोग घर बैठे नोट बदल लेंगे, लेकिन मध्यमवर्ग के जनता को परेशानी का सबब बनेगा। लाइन में लगेंगे, बैंक में कहा जाएगा; राशि ही नहीं है। बैंक का चक्कर काटते काटते चप्पल घिस जाएगा। 

समाजसेवी श्री यादव ने कहा कि 23 मई से 30 सितंबर तक ₹2000 का नोट बदलने का लीगल टेंडर प्रावधान है, भला जो नोट बंद हो गया, उसे खरीद-फरोख्त के माध्यम से कोई लेना नहीं चाहेगा। पुनः बदलने की समस्या , व्यर्थ का झंझट मोल नहीं लेगा। सरकार चित में भी एवं पट में भी जनता को फायदा लाभ का झूठा दिवास्वप्न दिखाती है जो पूर्णतः झूठा मनगढ़ंत है।

श्री यादव ने कहा कि 2000 के नोट को छापने, प्रकाशन करने, निर्गत करने, वितरण करने में अरबों रुपया खर्च हुई जो देश के खजाने पर आर्थिक बोझ बढ़ा। 

सामाजिक चिंतक श्री यादव ने कहा कि केंद्र सरकार के मंत्री, एमपी, एमएलए, बड़े बड़े अधिकारी, पूंजीपतियों एवं बाबाओं पर भी ईडी का छापामारी होनी चाहिए; दूध का दूध पानी का पानी नजर आ जाएगी।

श्री यादव ने कहा कि केंद्र सरकार की सबसे घटिया निम्न स्तरीय सोच है , सोच को जनहित के मद्देनजर सोचना होगा। बिना सोचे समझे कुछ भी निर्णय लेना, तानाशाह का प्रतीक है। मोदी सरकार को मोहम्मद बिन तुगलक के तरह दिल्ली से दौलताबाद एवं दौलताबाद से दिल्ली की सोच को बदलना होगा,  अनाप-शनाप निर्णय लेकर जनता को परेशान करना बंद करें , अन्यथा जनता कर्नाटक की तरह 2024 के चुनाव में इस तरह से कुर्सी को उखाड़ फेंकेंगे कि भाजपा आरएसएस मोदी योगी सरकार का नामो निशान सदा के लिए मिट जायेगा।

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