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बिहार की राजनीति गरमाईः LJP में टूट, JDU पर आरोप, BJP ने चिराग से पल्ला झाड़ा।

बिहार की राजनीति गरमाईः LJP में टूट, JDU पर आरोप, BJP ने चिराग से पल्ला झाड़ा।



बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है और उसकी वजह है लोक जनशक्ति पार्टी यानी एलजेपी में दो फाड़ होना. दिवंगत नेता रामविलास पासवान के छोटे भाई और चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने 5 सांसदों को साथ लेकर पार्टी पर अपना अधिकार जता दिया है. चिराग पासवान अलग-थलग पड़ गए हैं. यहां तक कि बीजेपी ने भी चिराग से पल्ला झाड़ लिया है. एलजेपी में टूट के पीछे जेडीयू के होने की बातें भी हो रही हैं. कांग्रेस ने भी जेडीयू पर ही आरोप लगाया है. हालांकि, जेडीयू इस बात से इनकार कर चुकी है.


नीतीश सरकार में मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी ने आजतक से बातचीत के दौरान कहा, "एलजेपी में हुई टूट से जेडीयू का कोई लेना देना नहीं है. जिस तरीके की नकारात्मक राजनीति एलजेपी के मुखिया चिराग पासवान ने विधानसभा चुनाव के दौरान की थी उसी का नतीजा है कि उनकी पार्टी अब टूट गई है."


अशोक चौधरी ने कहा कि चिराग पासवान की नकारात्मक राजनीति और कामकाज करने के तरीके से उनकी पार्टी के सांसद और नेता नाराज थे जिसके कारण पार्टी में टूट गई है. उन्होंने कहा, "जिस तरीके की नकारात्मक राजनीति पिछले विधानसभा चुनाव में की थी उससे उनकी पार्टी के लोग और अन्य नेता नाखुश रहे होंगे, तभी इतना बड़ा फैसला उन लोगों ने लिया है और पशुपति पारस के नेतृत्व में नए संसदीय दल का गठन किया है."


एलजेपी के पांचों सांसदों के जेडीयू में शामिल होने की अटकलों को भी अशोक चौधरी ने फिलहाल नकारा है. उन्होंने कहा, "जेडूयी की लोक जनशक्ति पार्टी को तोड़ने में कोई भूमिका नहीं है. लोजपा को टूटने में खुद लोजपा सांसदों की भूमिका है. लोजपा सांसदों की जनता दल पार्टी में शामिल होने की मुझे कोई जानकारी नहीं है."


दूसरी तरफ चिराग पासवान का लगातार समर्थन करने वाली बीजेपी के सुर भी टूट के बाद बदल गए हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा, "अब इस मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व उचित निर्णय लेगा. चिराग के साथ खड़े हैं या नहीं, इस पर अब केंद्रीय नेतृत्व ही कोई फैसला लेगा." 


उधर कांग्रेस ने भी एलजेपी में हुई टूट के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराया है. कांग्रेस एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा, "जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक नीतीश कुमार लोक जनशक्ति पार्टी में हुई टूट के पीछे हैं. सवाल ये उठता है कि नीतीश कुमार दूसरे दलों को क्यों तोड़ना चाहते हैं? जदयू धीरे-धीरे दलबदलू नेताओं की जमात बनती जा रही है."

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