बिहार प्रदेश पंच सरपंच संघ का न्याय यात्रा पहुंची खगड़िया, किया गया भव्य स्वागत
न्याय यात्रा सम्मेलन सह भव्य सम्मान समारोह का हुआ आयोजन
बलुवाही चौक से विभिन्न मार्गो होते हुए महापुरुषों के प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए निकाली गई न्याय पदयात्रा
खगड़िया। बिहार प्रदेश पंच सरपंच संघ खगड़िया के बैनर तले मधुरानी विवाह भवन हरदाश्चक में न्याय यात्रा सम्मेलन सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सह प्रदेश उपाध्यक्ष किरण देव यादव ने किया। तथा मंच संचालन कुलदीप सिंह ने किया।
इससे पूर्व बलुवाही चौक से पदयात्रा निकाली गई। इस दौरान स्वतंत्रता सेनानी राम बहादुर आजाद डॉक्टर अंबेडकर महात्मा गांधी कर्पूरी ठाकुर स्वतंत्रता सेनानी राम उदित साहू नेमधारी बाबू शहीद प्रभु नारायण सिंह चंद्रशेखर आजाद एवं डॉ राजेंद्र प्रसाद के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कोटि-कोटि नमन किया गया।
सम्मेलन में आगत अतिथि एवं पंच सरपंचों को अंगवस्त्र गांधी टोपी एवं पुष्प माला से सम्मानित किया गया।
सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने करते हुए कहा कि यह न्याय यात्रा सिर्फ यात्रा नहीं बल्कि न्याय आंदोलन है यह न्याय यात्रा पंच सरपंच के 11 सूत्री मांगों को लेकर पूरे बिहार में पंच सरपंचों के हक हकूक अधिकार के सवाल को लेकर निकाली गई है यदि मांगे पूरी नहीं होगी तो बिहार के सवा लाख पंच सरपंच सामूहिक इस्तीफा देंगे जिसका जिम्मेदार सरकार की होगी।
अध्यक्ष संबोधन में जिला अध्यक्ष किरण देव यादव ने कहा कि पंच सरपंचों को एमएलसी चुनाव का वोटर बनाएं, 2006 से पंच सरपंचों को पेंशन चालू करें, सम्मानजनक वेतन वृद्धि किया जाए अन्यथा आंदोलन तेज एवं उग्र होगी जिसका जिम्मेवार सरकार की होगी।
सम्मेलन में प्रदेश संयोजक पुष्पेंद्र ठाकुर प्रदेश उपाध्यक्ष वशिष्ठ निषाद प्रहरी संघ के प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह आदि ने संबोधित कर पंच सरपंचों की समस्या को रेखांकित किया।
सम्मेलन को अभिनंदन करते हुए अतिथि आरपीएफ इंस्पेक्टर अरविंद राम सरपंच संघ के जिला उपाध्यक्ष राजेंद्र यादव कुलदीप सिंह इंदु शेखर झा सरवन कुमार मनोज कुमार बंटी देवी रणवीर कुमार रीना देवी पंकज भगत राकेश यादव योगेंद्र पासवान शंकर राम शशिकांत पासवान रंजीत पासवान अनुराधा देवी डोली देवी अर्जुन महतो कंचन देवी परमानंद सिंह रुदल पासवान चंदन कुमार सिंधु प्रसाद आदि ने संबोधित किया।
धन्यवाद ज्ञापन इंदु शेखर ने किया।



