अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर समाजसेवी महिलाओं को किया गया सम्मानित।
महिलाओं को सच्चे अर्थों में सम्मान सुविधा आरक्षण अधिकार देने की जरूरत - किरण देव यादव
आजादी के 75 वर्ष बाद भी महिलाएं दोयम दर्जे की जिंदगी जीने को विवश - मधुबाला
आज भी समाज में महिलाओं से संबंधित सामाजिक बुराइयां कुरीतियां एवं पितृसत्तात्मक व्यवस्था कायम - चंपा राय
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर दी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं - उमेश ठाकुर
खगड़िया।
देश बचाओ अभियान एवं महिला विकास सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में संपर्क कार्यालय सभागार में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर देश बचाओ अभियान की ओर से समाज में उत्कृष्ट योगदान देने हेतु सामाजिक कार्यकर्ता मधुबाला, गायिका कवियत्री चंपा राय, स्वयंसेवी सुधा कुमारी एवं सामाजिक न्याय देने हेतु सरपंच रंजू कुमारी को अंगवस्त्र एवं बुके भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सर्वप्रथम गायिका चंपा राय ने महिला प्रेरणा गीत एवं महिला सशक्तिकरण पर आधारित कविता पाठ की, जिसे महिलाओं ने मुक्तकंठ से सराहा।
इस अवसर पर देश बचाओ अभियान के संस्थापक अध्यक्ष किरण देव यादव ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दिये तथा उज्जवल भविष्य की कामना किये।
सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष सह प्रदेश उपाध्यक्ष किरण देव यादव ने कहा कि 1857 में अमेरिका के कपड़ा मिल में महिला मजदूरों ने 8 घंटा काम करने, 8 घंटा आराम करने, 8 घंटा मनोरंजन करने, रविवार को छुट्टी देने एवं विशेष अवकाश देने, मजदूरी बढ़ाने आदि सवाल को लेकर क्रांतिकारी आंदोलन के पश्चात आंदोलन की जीत होने पर महिला दिवस मनाया जाने लगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की अब्बल भागीदारी हो रही है। महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़कर अग्रणी भूमिका निभा रही है। महिलाओं के जज्बे को सलाम सम्मान सुविधा अवसर देने की जरूरत है।
देश बचाओ अभियान के महासचिव उमेश ठाकुर ने कहा कि आज भी महिला सशक्तिकरण की जरूरत है।
समाजसेवी मधुबाला चंपा राय सरपंच रंजू कुमारी ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी आज महिलाएं दोयम दर्जे की जिंदगी जीने को विवश है। समुचित सम्मान महिलाओं को नहीं दी जा रही है। आज भी पितृसत्तात्मक व्यवस्था कायम है। आज समाज में सामाजिक बुराइयां कुरीतियां व्याप्त है। आज समाज में महिला हिंसा हत्या बलात्कार शोषण दमन अन्याय जैसी समस्याएं व्याप्त है। समाधान करने के लिए संघर्ष की आवश्यकता है। महिलाओं की स्वतंत्रता, आरक्षण, महिला अधिकार सही अर्थों में नहीं मिल पा रहा है। आज सच्चे अर्थों में महिला सशक्तिकरण की जरूरत है।


