मुख्यमंत्री के आगमन पर दुल्हन सी सजी थी रौन अलौली कामाथान खगरिया, और जाते ही विधवा सी विलाप करने को हो गई विवश - किरण देव यादव

मुख्यमंत्री के आगमन पर दुल्हन सी सजी थी रौन अलौली कामाथान खगरिया, और जाते ही विधवा सी विलाप करने को हो गई विवश - किरण देव यादव



"दुल्हन सी सजी धरती उजड़ा ये आसमान" आ अब लौट चलें"


समाधान यात्रा या व्यवधान यात्रा या फिर होगी अवसान यात्रा, सीएम के जाते ही बन गया शमशान यात्रा - किरण देव यादव


"देर से आना जल्दी जाना, ऐ साहेब ये ठीक नहीं,

चोरी से आना चुपके से जाना, ऐ साहेब ये ठीक नहीं",

ये आना भी कोई आना है, आए और चल दिए," गाना हुई चरितार्थ


आंधी की तरह आए, तूफान की तरह छा गए, बिजली की तरह गुम हो गए, सीएम नीतीश कुमार - किरण देव यादव


जनता का, जनता के द्वारा, जनता के लिए, कुछ भी नहीं, तो फिर यह कैसा लोकतंत्र और कैसी सुशासन की सरकार ? - किरण देव यादव


फरकिया मिशन ने किया समाधान यात्रा का जन समीक्षात्मक बैठक


खगड़िया बिहार जी हां। उपरोक्त शीर्षक का कोई अतिशयोक्ति नहीं है। चुंकि सुंदर कायाकल्प मेकअप पर पुती स्याह सी दिख रहा है चहुंओर, यथा कार्यक्रम स्थल, सडक, तरणोद्वार, रंग बिरंगी गुब्बारे से सजी हॉल स्टेज गेट, रंगी पुती सड़कें वृक्ष, बदलते मुखौटे से बदरंग बैनर, खुशबू विहीन फूलों की सजावट से सरावोर माहौल आदि में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने आंधी की तरह आए, तूफान की तरह छा गए और बिजली की तरह गुम भी हो गए। हालात ऐसी जैसे कि बारिश से मेकअप पुती लुटी पिटी चेहरे, आंधी से उड़ गया हो, तूफान में सब कुछ बर्बाद उजड़ गया हो, बिजली गुम होने से अंधेरे में काला चेहरा दृष्टिगोचर हो गया हो। चाय दुकान पर, चौपाटी चौपाल पर चर्चाओं में आमजनों का कहना - "चोरी से आना, चुपके से जाना , देर से आना जल्दी जाना, ऐ साहिब ये ठीक नहीं,,," यह आना भी कोई आना है आए और चल दिए, गानों को चरितार्थ कर गए सीएम नीतीश कुमार। चर्चाओं का बाजार गरम कि यह समाधान यात्रा है या बेईमान ब्यवधान यात्रा या फिर अवसान शमशान यात्रा ?

यह कैसी लोकसेवक जनता का सेवक जो आम जनों की समस्या दुख दर्द ही ना सुने फिर यह कैसा समाधान यात्रा ? किस समस्या का समाधान हुआ ? सुरसा की तरह यह सवाल मुंह बाए खड़ी कर गए सीएम नीतीश कुमार। अपने मुंह मियां मिठू होते दिखे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

भाकपा माले के जिला संयोजक किरण देव यादव ने समाधान यात्रा के औचित्य पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हुए कहा कि भला जिस समाधान यात्रा से कोई भी समस्या का समाधान नहीं हो, तो भला ये कैसा समाधान यात्रा ? चहुंओर कर्फ्यू जैसा माहौल, आम जनता से ज्यादा पुलिस प्रशासन, मुट्ठी भर अपने ही महकमे पार्टीगत लोगों से मिलना, जनप्रतिनिधियों को डायलमा में रख मिलने से इंकार नजरअंदाज करना, प्रशासन की आमजनों के साथ दोहरी नीति, उपेक्षा, सौतेला व्यवहार, फिर ये कैसा जनता का सेवक ?

श्री यादव ने कहा कि "जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए," कुछ भी नहीं, तो फिर यह कैसा लोकतंत्र, कैसा सुशासन, कैसी सरकार ?जनप्रतिनिधि द्वारा भी विकास समस्या समाधान संबंधित कोई मांग पत्र न लेना न देना, फिर जो जनता से दूरी बनाए,, तो आगामी कल अवसान यात्रा विदाई का ही प्रतीक होगी। ब्यवधान यात्रा इस मायने में कि कर्फ्यू जैसा माहौल में सभी दुकानें बंद, रोजगार बंद, यातायात बंद, रोगी यात्री जरूरतमंदों को कहीं भी जाना बंद, पक्षी को भी प्रवेश करने पर रोक जैसी माहौल , विकलांग विधवा शोषित पीड़ित वंचित गरीब पिछड़ा अति पिछड़ा को मुख्यमंत्री से मिलने पर रोक तो फिर यह कैसा सुशासन की सरकार ? तथा शमशान यात्रा इस मायने में कि 10 जिले के सभी पुलिसकर्मी समाधान में व्यस्त रहें और इधर समस्या उत्पन्न होती रही, चुंकि मूर्ति विसर्जन में डूबकर व ट्रेक्टर से गिरकर मौत, दुर्घटना, वाद विवाद, लड़ाई झगड़ा, चोरी, राहजनी, हत्या, अपहरण, दुष्कर्म, आदि सभी प्रकार की घटनाएं हर जिले की भांति खगड़िया अलौली में भी होती रही, कोई सुनने देखने वाला नहीं, प्रशासन का कहना कि अभी कुछ नहीं, अभी कोई काम नहीं, अभी सिर्फ मुख्यमंत्री कार्यक्रम में व्यस्त हैं। सर्वत्र अपराधिक गतिविधि तेज एवं प्रशासनिक समाधान में सुस्त,, प्रशासन सिर्फ समाधान यात्रा को सफल करने में मशगूल रहे। और अवसान यात्रा यानी बिदाई यात्रा इस मायने में कि आम जनता दुखी मायूस हताश निराश परेशान हो बेरंग वापस लौटे, विकलांग विधवा वंचित शोषित पीड़ित महादलित अल्पसंख्यक पिछड़ा अति पिछड़ा गरीब गुरबा लोगों का कहना कि सीएम नीतीश कुमार का यह अंतिम यात्रा है।

सकारात्मक पक्ष यह कि कुछ सड़क वृक्ष भवन की रंगाई पुताई निर्माण चमक दमक से कुछ पल कुछ विशेष स्थल पर आमजनों की आंखें चुंधियाई। करोड़ों रुपए की लगी चूना, हुई बंदरबांट। सुझाव देने के भाव में लोगों ने स्पष्ट स्वर में कहा कि इससे बेहतर तो अलौली गढ घाट पर पुल निर्माण करने, अलौली को स्टेडियम बनाने, अलौली में डिग्री कॉलेज का स्थापना करने, कचनाभित्ता पर 200 बीघा सरकारी जमीन पर एम्स हॉस्पिटल या मेडिकल कॉलेज खोलने, पुस्तकालय भवन बनाने में खर्च होता तो एक बहुत बड़ी उपलब्धि होती। यदि उक्त बड़ी खर्च अकबर के शासन काल में राजा टोडरमल द्वारा अपने शासनकाल से किया गया अलग "फरक एरिया" क्षेत्र "फरकिया" के सर्वांगीण विकास में लगता तो मील का पत्थर साबित होता।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समाधान यात्रा का जन समीक्षात्मक बैठक सामाजिक संगठन फरकिया मिशन के तत्वाधान में पुस्तकालय भवन परिसर में किया गया, जिसकी अध्यक्षता संस्थापक अध्यक्ष किरण देव यादव ने किया। बैठक में दर्जनों समाजसेवी रामचंद्र यादव सुरेश यादव ज्वाला यादव नरेश साहनी नृपेंद्र यादव तितली भारती दानवीर यादव महेंद्र सिंह मोहम्मद सोहेल मोहम्मद तंजीम कापो सदा उपेंद्र सदा प्रकाश ठाकुर आदि ने उपरोक्त भाव व्यक्त किये।

उपरोक्त वक्तव्य-भाव खोजी घुमक्कड़ स्वतंत्र पत्रकारों की आमजनों के भाव आधारित संयुक्त सारांश है। किन्ही के दिल को ठेस पहुंचाने की मानसिकता नहीं है सिर्फ सच्चाई को बयां की गई है। अभिव्यक्ति की आजादी जिंदाबाद, साथियों।

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